स्वतंत्रता दिवस पर निबंध | independence day essay in hindi

स्वतंत्रता दिवस पर निबंध

15 अगस्त 1947 भारत के इतिहास का महत्वपूर्ण और गौरवशाली दिन है | यह वह दिन था जिस दिन भारत को अंग्रेज़ो के गुलामी से आजादी मिली थी। यह दिन इतिहास के पन्नों पर सुनहरे अक्षरों में लिखा गया जिस दिन भारत के स्वतंत्रता सेनानियों ने सब कुछ न्योछावर कर देने के बाद स्वतंत्रता मिली थी ।इस दिन पहली बार देश में प्रधानमंत्री का चुनाव करके पंडित जवाहरलाल नेहरू को देश का प्रधानमंत्री घोषित कर सम्मानित किया गया था ।

यह ऐतिहासिक दिन था जब पहली बार दिल्ली में लाल किले पर स्वतंत्रता का तिरंगा झंडा लहराया गया था। भारतीय लोग आज भी प्रत्येक वर्ष इस दिन को एक उत्सव के रूप में मनाते है।

प्रस्तावना

ब्रिटिश साम्राज्य के काले बादल भारत पर २००२ सालो से छाये हुये थे. उसे 15 अगस्त 1947 को देश के वीर जवानों ने साफ कर दिया। भारत की आजादी के रूप में इस दिन को आज भी अवकाश के रूप में पूरे देश में मनाया जाता है। स्वतंत्रता मिलने के बाद से ही इस दिन का नाम स्वतंत्रता दिवस रख दिया गया।

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आज भी हर वर्ष उन महान वीर जवानों को महान आत्माओं और शहीदों को पूरे देश वासियों की तरफ से नमन किया जाता है और श्रद्धांजलि दिया जाता है। भारत देश जिन वीर लोगो के नेतृत्व में आजाद हुआ आज भी उन्हें प्रत्येक भारतवासी सम्मान की दृष्टि से देखता है और अपने अपने अंदाज में उनको नमन करते हुए 15 अगस्त के दिन को मनाता है।

भारतीय स्वतंत्रता दिवस का इतिहास

भारत में व्यापार करने के लिए ईस्ट इंडिया कंपनी जो अंग्रेजों द्वारा बनाई गई १६०८ में आई। उन दिनों पाकिस्तान बांग्लादेश भारत में ही था। भारत पिछड़ा होने के साथ-साथ गरीब भी था जिसके चलते अंग्रेजों ने व्यापार यहां पर शुरू किया और गरीबों को मजदूर बनाना शुरु कर दिया। गरीबों पर अत्याचार करना धीरे-धीरे उनकी फिदरत बन गई और उन्हें पैसा उधार देकर उन्हें कर्ज में दबा दिया करते थे।

गरीब लोग उनसे पैसा देने के बाद जब पैसा चुका नहीं पाते थे, तो अंग्रेजों के गुलाम बनते चले गए। देश में बहुत से राजा थे उस समय उनकी भी अंग्रेजों ने धन दौलत से मदद की और उनको अपने अधीन कर लिया। कुछ राजा जिन्होंने अधीन होने से मना कर दिया उन पर आक्रमण करके उन राजाओं को अपने अधीन करते गए। कुछ समय के बाद में ही पूरे भारत पर अंग्रेजों ने अपना नियंत्रण जमा लिया।

भारतीयों पर अत्याचार

भारत पर नियंत्रण के बाद धीरे-धीरे अंग्रेज़ो का रवैया और ज्यादा सख्त होता गया। भारत के गरीब लोगों पर अत्याचार करना, उनसे कर वसूलना, उनके खेतों पर कब्जा कर लेना अनाजों को हत्या लेना और भारतीय लोग भूख से तड़प कर मरने लगे। अंग्रेजों के अत्याचार का विरोध जब भी कोई करता तो उन पर गोलियां चला दी जाती थी। जलियांवाला बाग में जो कांड हुआ था वह आज भी गवाह है कि किस तरह अंग्रेजों ने भारतीय लोगों पर जुल्म ढाया था।

अंग्रेजो के खिलाफ भारतीयों का गुस्सा

जैसे जैसे अत्याचार बढ़ते गए वैसे वैसे अंग्रेजों के खिलाफ भारतीय लोगों में भी गुस्सा और बदले की भावना बढ़ती चली गई। विरोध और गुस्से की उस भावना ने पहली बार 1857 में मंगल पांडे के रूप में जन्म लिया जब मंगल पांडे ने अंग्रेजो के खिलाफ आवाज उठाई। अंग्रेजो के खिलाफ उठे उस विद्रोह को अंग्रेजों ने तुरंत गिरा दिया जिससे भारतीय लोगों में अंग्रेजों के प्रति कई गुना गुस्सा बढ़ गया और नए-नए आंदोलनों ने जन्म लेना शुरू कर दिया।

आजादी की मांग

अब भारतीय लोग भारत के लोगों पर अत्याचार सहन नहीं कर पा रहे थे उनका गुस्सा अब सिर्फ आजादी चाहता था। मंगल पांडे के विरोध के बाद धीरे-धीरे देश के विभिन्न स्थानों पर विरोध की आवाज उठती चली गई, और अंग्रेजों के अत्याचार के खिलाफ देश में विद्रोह बढ़ता चला गया।

स्वतंत्रता के लिए स्वतंत्रता सेनानियों का महत्वपूर्ण योगदान

देश में विद्रोह की आग फैल गई। उस आग से भारत देश में बड़े-बड़े स्वतंत्रता सेनानियों ने जन्म ले लिया। स्वतंत्रता कि इस लड़ाई में महत्वपूर्ण और अतुल्य योगदान महात्मा गांधी ने निभाया। अंग्रेजों को भारत पर राज करते हुए लगभग 200 साल से भी ज्यादा का समय हो गया था, तब गांधीजी ने अपनी आवाज उठाई और सत्य और अहिंसा जैसे दो हथियारों को अपना साधन बना लिया।

अहिंसा का नारा लगाते हुए गांधी जी ने देश के बहुत सारे देशवासियों को अपनी ओर कर लिया और अत्याचार के खिलाफ लड़ना सिखाया। गांधी जी की बातों का लोगों पर बहुत असर हुआ जिसके चलते देश के अधिकतम लोगों ने आजादी की लड़ाई में बढ़-चढ़कर अपना योगदान दिया। लोगों के प्यार सम्मान और गांधीजी के प्रति भाव ने गांधी जी को बापू के नाम से मशहूर कर दिया।

स्वतंत्रता सेनानियों का आजादी में योगदान

हालांकि महात्मा गाँधी ने पूरे हिंदुस्तान को अंग्रज़ो के विरोध की आग से भड़का दिया था इस वजह से स्वतंत्रता का संग्राम पूरे हिंदुस्तान में फैल गया। बापू के पद चिन्हों पर चलने वाले और भी कई महान नेताओं ने देश में जन्म लिया जैसे जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, बाल गंगाधर तिलक और अन्य बहुत से ऐसे स्वतंत्रता सेनानी अहिंसा की इस लड़ाई में उतर कर आए जिन्हें स्वतंत्रता सेनानी का खिताब दिया गया।

अंग्रेजी हुकूमत को खत्म करने के लिए बिना जंग के जितना गांधी जी ने काम किया, उतना ही कुछ ऐसे क्रांतिकारी ने भी लड़ाई करके अंग्रेजो के खिलाफ आवाज उठाई और योगदान दिया . क्रांतिकारियों में मंगल पांडे, चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह राजगुरु आदि ने देश को आजाद कराने के लिए खुद को कुर्बान कर दिया । देश के महान क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता सेनानियों की मेहनत और लग्न रंग लाई, आखिरकार 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। इसलिए प्रत्येक वर्ष बहुत इंतजार के बाद आए इस दिन को स्वतंत्रता दिवस के रुप में मनाया जाता है।

आजादी


15 अगस्त का दिन जैसे ही आता है सभी लोगों के दिलों में अपने आप देशभक्ति उमड़ पड़ती है, और देश भक्ति भरे गाने और फिल्मों को देखने का मन करता है। भले ही स्वतंत्रता की लड़ाई का हिस्सा आज के नौजवान नहीं बन पाए हो, लेकिन आज भी उन सेनानियों को लेकर उनके दिल में वही प्रेम भाव और सम्मान जीवित है जो हर 15 अगस्त को हर की आंखों से जरूर झलकता है। TV पर भी विभिन्न कार्यक्रम गीत संगीत प्रसारित किए जाते हैं जो भारत देश की स्वतंत्रता का महत्व समझाते हैं।

15 अगस्त 1947 का वह एक ऐसा दिन था जो यादगार होने के साथ-साथ बेहद भावुक कर देने वाला भी है। उस दिन पहली बार जवाहरलाल नेहरु जी ने जो भारत के प्रथम प्रधानमंत्री के रूप में जाने गए देश के नागरिकों को संबोधित किया और देश का गौरव भारतीय झंडा लहराया।

इस प्रथा को 15 अगस्त 1947 को प्रारंभ किया गया था जिसे आज तक प्रत्येक प्रधानमंत्री द्वारा निभाया जाता है। दिन प्रतिदिन देशभक्ति वाले कार्यक्रम में बढ़ोतरी हुई है हर साल लाल किले पर झंडा रोहण के साथ-साथ परेड होती है और देश के गौरव को दर्शाया जाता है। देश के गौरव के साथ-साथ लाल किले पर बहुत सारे ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं जो भारत देश की विभिन्न प्रकार की संस्कृति को दर्शाते हैं।

भारत पूरी तरह से विविधताओं वाला देश है जहां पर करोड़ों लोग अलग-अलग धर्म विभिन्न परंपराओं और संस्कृति के होने के बावजूद भी एक साथ रहते हैं। भले ही वे अपने त्यौहार अलग-अलग मनाते हो लेकिन जब स्वतंत्रता दिवस की बात आती है तब पूरा भारत एक ही रंग में दिखाई देता है।

भारतीय होने के नाते प्रत्येक भारतीय अपने आप पर गर्व करता है और उन्हें गर्व करना भी चाहिए. साथ ही यह वादा भी करना चाहिए कि अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए हम हर मुश्किल से पूरी इमानदारी और श्रद्धा भाव के साथ टकराएंगे।